दो पीढ़ियों से देशसेवा में समर्पित : बिजौलिया राजवंश के ब्रिगेडियर कौशल पंवार दे रहे है अग्निवीरों को ट्रेनिंग
ललित चावला बिजौलिया | 13 Dec 2025
बिजौलिया। मेवाड़ की वीरभूमि बिजौलियां का गौरव एक बार फिर पूरे देश में गूंज रहा है। बिजौलियां राजवंश न केवल इतिहास में शौर्य का प्रतीक रहा है, बल्कि वर्तमान में भी लगातार दूसरी पीढ़ी भारतीय सेना में वीरता और समर्पण की अमिट छाप छोड़ रही है।भारतीय सेना की दक्षिण कमान में स्कूल ऑफ टेक्निकल ट्रेनिंग, अहिल्या नगर (महाराष्ट्र) में तैनात ब्रिगेडियर कौशल पंवार वर्तमान समय में अग्निवीर भर्ती और प्रशिक्षण व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में प्रशिक्षण पा रहे अग्निवीर भारतीय सेना के नए युग की मजबूत रीढ़ बन रहे हैं।
बीती 3 दिसंबर को ब्रिगेडियर पंवार के मार्गदर्शन में एसीसी एंड एस में 521 अग्निवीर और एमआईआरसी में 414 अग्निवीर ने कठिन 31 सप्ताह के व्यापक सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा कर शानदार पासिंग आउट परेड में शपथ ग्रहण की। परेड का जोश, अनुशासन और सैन्य गौरव यह साबित करता है कि बेहतर नेतृत्व किस तरह भविष्य के जवानों को संवारता है।
ब्रिगेडियर कौशल पंवार की देशसेवा की यह ज्योति उनके परिवार की परंपरा का ही विस्तार है। उनके पिता जगन्नाथ सिंह पंवार भारतीय सेना में कमांडेंट के पद से सेवाएं देकर बीएसएफ में नियुक्त हुए और सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए। इन्होंने इंडिया-पाकिस्तान की दो लड़ाई 1965 और 1971 भी लड़ी थीl 1965 में इनकी तैनाती सबसे ज़्यादा सेंसिटिव बेल्ट छम जोडिया सेक्टर जम्मू काश्मीर और 1971 में राजौरी पुंछ सेक्टर जम्मू कश्मीर में थीl
देशभक्ति और अनुशासन की यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है।इतिहास के पन्ने भी इस राजवंश के गौरव से चमकते रहे हैं। बिजौलियां के संस्थापक अशोक पंवार (परमार) के समय से लेकर लोकतंत्र की स्थापना तक यह राजवंश मेवाड़ की प्रशासनिक और सामरिक शक्ति का केंद्र रहा। इतना ही नहीं, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का ससुराल भी बिजौलियां राजवंश में होना इस परिवार के ऐतिहासिक महत्व को और अधिक उजागर करता है।बिजौलियां का राजवंश आज भी देश की रक्षा हेतु समर्पण, त्याग और गौरव की जीती-जागती मिसाल बना हुआ है—बीते हुए स्वर्णिम इतिहास और वर्तमान सैन्य योगदान का यह अनूठा संगम बिजौलिया राजवंश मे देखने को मिल रहा हैl