बिजौलिया में चरागाह भूमि पर अतिक्रमण: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर उपखण्ड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
ललित चावला बिजौलिया | 07 Jan 2026
बिजौलिया। उपखण्ड क्षेत्र की समस्त ग्राम पंचायतों के अधीन आने वाली चारागाह (गोचर) भूमियों पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर आज ऊपरमल बिजौलिया क्षेत्र के गौ भक्तों ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया है। इस संबंध में उपखण्ड अधिकारी, बिजौलिया को एक ज्ञापन सौंपकर चारागाह भूमियों का सीमांकन कर अतिक्रमण मुक्त कराने एवं उनके संरक्षण की मांग की गई है।
बिजौलिया ब्लॉक में चारागाह पर अतिक्रमियों का कब्जा
ऊपरमाल बिजौलिया के गौ भक्त एसडीएम अजीत सिंह को ज्ञापन देते हुए
ज्ञापन में बताया गया कि बिजौलिया उपखण्ड क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतों की चारागाह भूमियों पर भूमाफियाओं द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। इसके चलते गौवंश सहित अन्य मवेशियों के लिए चरने और भोजन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। चारागाह भूमि सिकुड़ने से पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं गौशालाओं में रह रही गायें भी स्वतंत्र रूप से विचरण नहीं कर पा रही हैं।
चारागाह से अवैध कब्जे हटे, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना हो
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2011 में जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य सरकार प्रकरण में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि चारागाह एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमियों से अवैध अतिक्रमण हटाए जाएं तथा किसी भी प्रकार से अवैध कब्जों को नियमित नहीं किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए ठोस योजना बनाकर उसका पालन करने के निर्देश दिए थे।
राजस्व विभाग करे सीमांकन
ज्ञापन में मांग की गई है कि उपखण्ड कार्यालय बिजौलिया की सीमा में आने वाली सभी ग्राम पंचायत मुख्यालयों की चारागाह भूमियों का राजस्व विभाग द्वारा अवलोकन कर सीमांकन किया जाए। इसके पश्चात सम्पूर्ण चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटवाकर उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जाए तथा संबंधित अतिक्रमणकर्ताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कर भविष्य में पुनः अतिक्रमण न हो, इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
गौभक्त रामफूल धाकड का कहना है कि यदि समय रहते चारागाह भूमियों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया तो आने वाले समय में पशुधन के सामने और भी गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।