संविदा एवं ठेका पद्धति समाप्त करने की मांग : स्थायी भर्तियां निकालकर मानदेय बढ़ाने के लिए लिखा पत्र
ललित चावला बिजौलिया | 22 Jan 2026
बिजौलिया। बिजौलिया ऊपरमाल पर्यावरण समिति के उपाध्यक्ष शक्ति नारायण शर्मा ने संविदा कर्मियों एवं ठेका पद्धति से लगाए गए कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। पत्र में शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार के लगभग प्रत्येक विभाग में बड़ी संख्या में संविदा एवं ठेका कार्मिक कार्यरत हैं, जो स्थायी कर्मचारियों की तुलना में कहीं अधिक कार्यभार संभाल रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है।
शर्मा ने बताया कि वर्तमान मानदेय इतना कम है कि इन कर्मचारियों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना तो दूर, स्वयं का दैनिक खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे संविदा और ठेका कर्मियों का भविष्य असुरक्षित बना हुआ है। पत्र में विशेष रूप से राजस्थान के आयुर्वेद विभाग का उल्लेख करते हुए शर्मा ने बताया कि विभाग में लगभग 300 वैद्य संविदा पर कार्यरत हैं, जिनका कार्यकाल कई वर्षों से चला आ रहा है। इनमें से कई वैद्य ऐसे हैं जिनके सेवानिवृत्ति में मात्र 2 से 3 वर्ष शेष हैं, लेकिन संविदा पर होने के कारण उन्हें न तो पेंशन का लाभ मिलेगा और न ही किसी प्रकार की भविष्य निधि। इससे इन वैद्यों का भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है।
शर्मा ने कहा कि सरकार संविदा एवं ठेका पद्धति के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति कर आर्थिक भार तो कम कर लेती है, लेकिन इसका खामियाजा कर्मचारियों को असुरक्षित भविष्य के रूप में भुगतना पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को संविदा और ठेका पद्धति को समाप्त कर उसके स्थान पर लाखों की संख्या में नई स्थायी भर्तियां निकालनी चाहिए, जिससे युवाओं को स्थायी रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने यह भी मांग की कि जब तक संविदा एवं ठेका पद्धति लागू है, तब तक इन कर्मियों के मानदेय में परिवार चलाने योग्य वृद्धि की जाए। साथ ही एक नई नीति बनाकर संविदा कर्मियों एवं ठेका कार्मिकों को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाए।