UGC नया नियम विवाद: कॉलेजों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए UGC का नया नियम, देशभर में बहस तेज, बिजौलिया में भी विरोध
ललित चावला बिजौलिया | 29 Jan 2026
बिजौलिया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जात-पांत एवं ऊंच-नीच के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए जारी किया गया नया नियम इन दिनों देशभर में चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। UGC का कहना है कि अब किसी भी शैक्षणिक संस्थान में छात्र या शिक्षक के साथ जातिगत भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
UGC के नए निर्देशों के अनुसार, हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में एक विशेष समिति (कमेटी) का गठन किया जाएगा। यह समिति छात्रों या शिक्षकों द्वारा की गई शिकायतों की जांच करेगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। UGC का मानना है कि इस कदम से उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, सम्मान और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित होगा। हालांकि, इस नियम को लेकर छात्र संगठनों और कुछ सामाजिक संगठनों ने सवाल भी खड़े किए हैं। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति किसी पर झूठा या दुर्भावनापूर्ण आरोप लगा देता है, तो ऐसे में बेगुनाह की निष्पक्ष सुनवाई कैसे होगी। संगठनों का तर्क है कि नियम लागू करने से पहले झूठी शिकायतों से बचाव के लिए भी स्पष्ट और मजबूत प्रक्रिया तय की जानी चाहिए थी। विवाद बढ़ने के बावजूद UGC अपने फैसले पर कायम है और साफ कर चुका है कि भेदभाव के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जाएगी। आयोग का कहना है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष होगी और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा।
इस मुद्दे का असर स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। बिजौलिया क्षेत्र में भी इस नियम को लेकर चर्चा तेज है। कई लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे UGC का गलत कदम बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। वहीं कुछ लोग इस नियम को सामाजिक न्याय की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं। कुल मिलाकर, UGC का यह नया नियम एक ओर जहां भेदभाव के खिलाफ सख्त संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग की आशंका को लेकर सवाल भी खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और UGC इस विवाद पर क्या स्पष्टीकरण या संशोधन लाते हैंl
आसान भाषा में इसे समझते हैं
नया नियम क्या बोलता है?
अब हर कॉलेज में एक कमेटी बनेगी अगर कोई बोले “मेरे साथ भेदभाव हुआ” तो कॉलेज को उसकी बात सुननी पड़ेगी, समय पर फैसला करना पड़ेगाl पहले ऐसा होता था, “अरे छोड़ो, पढ़ाई करो, ये सब मत बोलो” अब ऐसा नहीं चलेगा।
झगड़ा क्यों मचा?
अब बात सीधी है, एक तरफ लोग बोल रहे हैं, “अगर कोई झूठी शिकायत कर दे तो? तब जिस पर आरोप लगेगा, उसकी कौन सुनेगा?” उन्हें डर है कि गलत केस में फंसा दिए जाएंगे। दूसरी तरफ लोग बोल रहे हैं, “भाई, हम गरीब-कमज़ोर लोग
पहले बोलते ही नहीं थे, अब जाकर हमारी सुनवाई होगी।” उन्हें लगता है ये नियम बहुत जरूरी था।
असली बात क्या है?
सीधी बात: सरकार कह रही है “सब बराबर रहें, कोई दबे नहीं” विरोध करने वाले कह रहे हैं –“बराबरी ठीक है, पर दोनों की सुरक्षा हो”