बिजौलिया में निखर रही ‘काले सोने’ की फसल: पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुई चिराई

ललित चावला बिजौलिया | 11 Feb 2026

 पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुई चिराई

चांदजी की खेड़ी गांव में लहलहाती अफीम की फसल

बिजौलिया तहसील क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों काले सोने के नाम से मशहूर अफीम की फसल पूरे निखार पर है। चांदजी की खेड़ी, गोपाल निवास, बृजपुरा, देवीनिवास, गोरधन निवास और सलवटिया सहित आसपास के गांवों में डोडों के आने के साथ ही किसानों ने परंपरा अनुसार खेतों की मेड़ पर माताजी की स्थापना कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी है। शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा के बाद डोडों में चिराई (चीरा लगाने) का कार्य प्रारंभ किया गया।

डोडो में चीरा लगाता एक किसान

डोडो में चीरा लगाता एक किसान

दिन में चिराई, सुबह एकत्र होता है गाढ़ा दूध

अच्छी फसल की कामना को लेकर पूजा अर्चना करते हुए

अच्छी फसल की कामना को लेकर पूजा अर्चना करते हुए

किसान राजेश धाकड़ ने बताया कि दिन के समय डोडों में चीरा लगाया जाता है, जिससे दूध निकलता है। यह दूध रातभर में सूखकर गाढ़ा हो जाता है और सुबह पाउडर के रूप में एकत्र किया जाता है। पहले एक फसल से लगभग पांच बार दूध निकाला जाता था, लेकिन इस बार ‘धोली मिस्सी’ और ‘खाखरिया’ रोग के प्रकोप के कारण केवल दो बार ही दूध निकल पा रहा है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
 
रोग का असर, उत्पादन घटने की चिंता

पौधों में फैल रहे रोग के कारण डोडों की गुणवत्ता और दूध की मात्रा दोनों प्रभावित हो रही हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते रोग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो इस वर्ष उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

चोरी और नशेड़ियों का खतरा, रातभर पहरा

किसान नरेश धाकड़ ने बताया कि फसल को पशु-पक्षियों से बचाने के लिए खेतों को जाली से ढक दिया गया है। इसके बावजूद नशेड़ियों और स्मैकियों द्वारा डोडे चोरी किए जाने की घटनाओं के डर से किसानों को रातभर खेतों में पहरा देना पड़ रहा है। लगातार निगरानी के कारण किसानों को शारीरिक थकान का सामना करना पड़ रहा है।

24 पट्टों पर खेती, दिन-रात डेरा

चांदजी की खेड़ी गांव में सर्वाधिक 5 और 10 आरी के कुल 24 पट्टे आवंटित किए गए हैं। क्षेत्र में डोडों के पकने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। परंपरा के अनुसार चिराई के दौरान किसान सुबह खेत में प्रवेश करते समय और शाम को बाहर निकलते समय माताजी की पूजा करते हैं। फिलहाल किसान दिन-रात खेतों पर डेरा डाले हुए हैं और 24 घंटे फसल की सुरक्षा में जुटे हैं। अफीम की यह फसल क्षेत्र के किसानों के लिए इस समय उम्मीद और चुनौती दोनों बनी हुई है।

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