बिजौलिया में रॉयल्टी नाके सरकारी हाथों में : खनिज विभाग पर दादागिरी के आरोप, हैंड कट को मशीन कट बताकर वसूली से रोष

ललित चावला बिजौलिया | 11 Apr 2026

खनिज विभाग पर दादागिरी के आरोप, हैंड कट को मशीन कट बताकर वसूली से रोष

बिजौलिया में रॉयल्टी नाकों पर इन दिनों खनिज विभाग द्वारा सेंड स्टोन परिवहन पर रॉयल्टी वसूलने कि कार्रवाई की जो रही है। ड्राइवरों का आरोप है कि हैंड कट पत्थर को जबरन मशीन कट बताकर अधिक रॉयल्टी वसूली जा रही है और वाहनों को रोककर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

रॉयल्टी वसूली अब विभाग के हाथ में

खान विभाग द्वारा काटी गई रॉयल्टी की रसीद

खान विभाग द्वारा काटी गई रॉयल्टी की रसीद

31 मार्च तक पत्थर पर रॉयल्टी वसूली निजी ठेकेदार द्वारा की जा रही थी, लेकिन ठेका आगे नहीं बढ़ने के कारण 1 अप्रैल से खनिज विभाग ने स्वयं यह जिम्मेदारी संभाल ली है। अब विभाग की टीम सेंड स्टोन से भरे ट्रक-ट्रैक्टरों से सीधे रॉयल्टी वसूल रही है।

प्रमुख नाकों पर सख्ती, निजी कर्मचारी भी तैनात

बिजौलिया शक्करगढ़ चौराहा, भोपतपुरा, कास्या और मेनाल नाकों पर माइनिंग फोरमैन और बाबुओं की टीमें तैनात हैं। इनके साथ निजी कर्मचारी भी मौजूद हैं, जिससे वाहन चालकों में असंतोष बढ़ रहा है। सेंड स्टोन पर दो दरों पर रॉयल्टी वसूली की जा रही है। नेचुरल हैंड कट पत्थर पर 145 रुपए प्रति टन और मशीन कट पत्थर पर 320 रुपए प्रति टन के हिसाब से टैक्स वसूला जाना रहा है।

ड्राइवरों के आरोप: जबरन ज्यादा वसूली

बिजौलिया से कांडला पोर्ट गुजरात के लिए पत्थर परिवहन कर रहे ड्राइवर  देवीलाल का कहना है कि वे हैंड कट पत्थर लेकर जा रहे हैं, लेकिन नाकों पर उन्हें रोककर मशीन कट बताकर 320 रुपए प्रति टन के हिसाब से रॉयल्टी जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि हम कांडला पोर्ट तक पत्थर ले जा रहे हैं, फिर भी बेवजह रोककर अधिक रॉयल्टी वसूली जाती है। कई बार रातभर वाहन खड़ा रखा जाता है और पुलिस की धमकी दी जाती है।  निजी कर्मचारियों की मौजूदगी और कथित दबाव की शिकायतों के बीच खनन व्यवसायियों व ड्राइवरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। वहीं, खनिज विभाग अपनी कार्रवाई को पूरी तरह नियमों के अनुरूप बता रहा है।

इनका कहना 

माइनिंग फोरमैन मनमोहन मीणा का कहना है कि विभाग नियमानुसार ही कार्रवाई कर रहा है। उनके अनुसार, यदि पत्थर हैंड कट होने के बावजूद एक समान साइज में काटकर “ड्रेस कट” बनाया गया है, तो उसे मशीन कट माना जाएगा और उसी हिसाब से 320 रुपए प्रति टन रॉयल्टी वसूली जाएगी।

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