भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: कथा वाचक बोले- ईश्वर के चरणों में संशय न रखें, जीवन प्रभु को समर्पित करें
ललित चावला बिजौलिया | 01 Oct 2026
बिजौलिया। इंद्रपुरा गौशाला, चांदजी की खेड़ी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। बाल गोपाल के प्राकट्य के साथ ही श्रद्धालुओं ने “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारे लगाए। इस दौरान श्रद्धालु भक्ति में भावविभोर होकर झूमते और नाचते नजर आए।
ईश्वर के चरणों में संशय न रखें
कथा व्यास ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, वैराग्य और जीवन के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अपने इष्ट भगवान के श्रीचरणों में किसी प्रकार का संशय नहीं रखना चाहिए। मनुष्य को जीवन में होने वाली घटनाओं को लेकर अनावश्यक चिंता और मोह में नहीं फंसना चाहिए। यदि मनुष्य भवसागर से पार होना चाहता है तो उसे मोह का त्याग कर भगवान की भक्ति में मन लगाना होगा।
उन्होंने कहा कि मन के अनुसार परिस्थितियां होने पर प्रसन्न और विपरीत परिस्थितियों में दुखी होने के बजाय व्यक्ति को हर परिस्थिति में प्रभु का स्मरण करना चाहिए। यह संसार क्षणभंगुर है, जबकि भगवान ही मनुष्य के सच्चे सहारे हैं। कथा वाचक ने श्रद्धालुओं से जीवन को प्रभु के चरणों में समर्पित करने का आह्वान किया।
गुरु के चरणों में समर्पित करें मन
कथा वाचक ने जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझे बिना उसे व्यर्थ गंवा देता है, वह जीवन का सदुपयोग नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि यदि मन संसार की ओर भटक रहा है तो उसे अपने गुरु और भगवान के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। भक्ति और सत्संग के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर कथा स्थल पर बाल गोपाल के स्वरूप की आकर्षक झांकी सजाई गई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर आरती की। भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाया गया और बाद में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। जन्मोत्सव के दौरान पूरा कथा पंडाल जयकारों और भजनों से भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माताएं, बहनें, श्रद्धालु एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे।