LIVE बिजौलिया पालिका में चेयरपर्सन की कुर्सी पर सियासी घमासान: 12 भाजपा, 11 कांग्रेस और 2 निर्दलीय... बिजौलिया में चेयरपर्सन की कुर्सी फंसी

ललित चावला बिजौलिया | 14 Sep 2026

12 भाजपा, 11 कांग्रेस और 2 निर्दलीय... बिजौलिया में चेयरपर्सन की कुर्सी फंसी

बहुमत के लिए चाहिए 13 सीटें, निर्दलीयों के समर्थन पर टिकी दोनों दलों की निगाहें—

कांग्रेस ने शुरू किया संपर्क, गढ़ पैलेस में हुई सौभाग्य सिंह से अहम मुलाकात

गढ़ पेलेस में कांग्रेस नेता प्रद्युम्न सिंह पहुंचे कुंवर सौभाग्य सिंह से मुलाकात के लिए

गढ़ पेलेस में कांग्रेस नेता प्रद्युम्न सिंह पहुंचे कुंवर सौभाग्य सिंह से मुलाकात के लिए

बिजौलिया। नगर पालिका चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद बिजौलिया की सियासत में नया मोड़ आ गया है। 25 वार्डों वाली नगर पालिका में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। चुनाव परिणाम में भाजपा को 12, कांग्रेस को 11 और दो निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली है। ऐसे में चेयरपर्सन की कुर्सी के लिए अब निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

चेयरपर्सन बनाने के लिए 25 में से कम से कम 13 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। भाजपा बहुमत से एक सीट दूर है, जबकि कांग्रेस को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए दो सीटों की जरूरत है। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों की निगाहें वार्ड 11 से निर्दलीय जीते राधेश्याम रैगर और वार्ड 19 से निर्दलीय विजेता राज परिवार के कुंवर सौभाग्य सिंह पर टिक गई हैं।

कांग्रेस ने शुरू किया निर्दलीयों से संपर्क

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद कांग्रेस ने निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साधने का दौर शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस के युवा नेता प्रद्युम्न सिंह (हैप्पी बना) ने वार्ड 19 से निर्दलीय निर्वाचित कुंवर सौभाग्य सिंह से गढ़ पैलेस में निजी मुलाकात की। दोनों के बीच हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। वहीं भाजपा ने भी कुंवर सौभाग्य सिंह से मुलाकात का दौर शुरू किया है।

हालांकि मुलाकात में क्या राजनीतिक चर्चा हुई और समर्थन को लेकर कोई सहमति बनी या नहीं, इसे लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं वार्ड 11 से निर्दलीय निर्वाचित राधेश्याम रैगर के बिजौलिया से बाहर होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में उनकी भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं।

एक निर्दलीय के समर्थन से भी बराबरी की स्थिति

चुनाव परिणाम के गणित पर नजर डालें तो भाजपा के पास 12 और कांग्रेस के पास 11 सीटें हैं। यदि कांग्रेस को एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन मिल जाता है तो दोनों दल 12-12 की बराबरी पर पहुंच जाएंगे। ऐसी स्थिति में दूसरे निर्दलीय पार्षद का समर्थन चेयरपर्सन के चुनाव में निर्णायक हो सकता है। यानी वर्तमान समीकरण में दोनों निर्दलीय पार्षदों की भूमिका किसी किंगमेकर से कम नहीं है। आने वाले दिनों में किस निर्दलीय का झुकाव किस ओर होता है, यही पालिका की अगली सियासी तस्वीर तय करेगा।

सौभाग्य सिंह के रुख पर सबसे ज्यादा नजर

वार्ड 19 से जीत दर्ज करने वाले कुंवर सौभाग्य सिंह के रुख को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। वे लंबे समय से कांग्रेस के समर्थक रहे हैं और कांग्रेस के विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता भी रही है। हालांकि इस बार नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया और उनकी जगह सुरेंद्र पाल सिंह को मैदान में उतारा था, इस सुरेंद्र पाल सिंह चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर सके, जबकि टिकट से वंचित रहे कुंवर सौभाग्य सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीत गए।

अब चुनाव परिणाम के बाद यही राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या वर्षों से कांग्रेस समर्थक रहे सौभाग्य सिंह इस बार भी कांग्रेस के साथ खड़े होंगे या फिर पालिका में सत्ता के नए समीकरण तैयार होंगे।

भाजपा के सामने भी बड़ी चुनौती

भाजपा के पास सबसे ज्यादा 12 सीटें होने के बावजूद पार्टी भी बहुमत से एक कदम दूर है। ऐसे में भाजपा को भी कम से कम एक निर्दलीय के समर्थन की आवश्यकता होगी। यदि भाजपा दोनों निर्दलीयों को अपने पक्ष में करने में सफल रहती है तो चेयरपर्सन की कुर्सी उसके लिए आसान हो सकती है। वहीं कांग्रेस भी अपने पुराने राजनीतिक समीकरणों और निर्दलीय पार्षदों से संपर्क के जरिए बहुमत जुटाने की कोशिश में है। दोनों दलों के बीच पर्दे के पीछे बैठकों और संपर्कों का दौर तेज होने की संभावना है।

अब हर कदम पर टिकी निगाहें

बिजौलिया नगर पालिका के चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि इस बार चेयरपर्सन का चुनाव सामान्य बहुमत के बजाय सियासी रणनीति, संपर्क और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से तय होने वाला है। फिलहाल भाजपा के 12, कांग्रेस के 11 और दो निर्दलीयों के बीच बना यह गणित बेहद दिलचस्प है। एक तरफ कांग्रेस निर्दलीयों को साधने में जुटी है तो दूसरी ओर भाजपा भी बहुमत के आंकड़े को हासिल करने की रणनीति बनाने में जुटी होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वार्ड 11 के राधेश्याम रैगर और वार्ड 19 के कुंवर सौभाग्य सिंह में से किसका समर्थन किस दल को मिलता है? और आखिरकार इन दोनों में से किसके समर्थन से बिजौलिया नगर पालिका की चेयरपर्सन की कुर्सी पर भाजपा या कांग्रेस का कब्जा होता है—इस पर पूरे बिजौलिया की नजरें टिकी हैं।

Share this news:
Facebook WhatsApp

More news