एक तबादला, कई सवाल: करोड़ों की एमडी ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ करने वाले एएसआई नरेश कुमार सुखवाल का तबादला, लोगों ने कहा—'ऐसे अधिकारी बार-बार नहीं मिलते'
ललित चावला बिजौलिया | 11 Jul 2026
बिजौलिया। पुलिस की वर्दी पहनकर कई अधिकारी आते हैं और अपने कार्यकाल के बाद चले भी जाते हैं, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो अपने काम, व्यवहार और ईमानदार कार्यशैली के कारण लोगों की यादों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। कांस्या पुलिस चौकी प्रभारी एएसआई नरेश कुमार सुखवाल भी अब उन्हीं अधिकारियों की कतार में शामिल हो गए हैं। उनके मांडलगढ़ थाना क्षेत्र की लाडपुरा पुलिस चौकी में तबादले की खबर सामने आते ही बिजौलिया क्षेत्र में निराशा और चर्चा का माहौल बन गया।
अपराधियों मे खौफ का नाम रहे नरेश
कांस्या पुलिस चौकी स्टाफ के साथ पेट्रोलिंग करते हुए
मध्यप्रदेश सीमा से सटी कांस्या रपुलिस चौकी लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती रही है। ऐसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में एएसआई सुखवाल ने अपने नेतृत्व में लगातार सख्त कार्रवाई कर अपराधियों में कानून का भय पैदा किया और आमजन के मन में पुलिस के प्रति भरोसा मजबूत किया।
करोड़ों कि एमडी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया
उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में जून माह में कांस्या क्षेत्र के जंगलों में करोड़ों रुपये मूल्य की एमडी ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ शामिल है। प्रदेश की चर्चित एनडीपीएस कार्रवाईयों में गिनी गई इस कार्रवाई ने पूरे राजस्थान का ध्यान बिजौलिया की ओर खींचा। इस सफल अभियान का नेतृत्व एएसआई नरेश कुमार सुखवाल ने किया था, जिसकी पुलिस महकमे के साथ-साथ आमजन ने भी सराहना की। यही कारण है कि प्रभावी कार्रवाईयों और बेहतर पुलिसिंग के बावजूद उनके तबादले को लेकर क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
ट्रांसफर से लोग आश्चर्य में पड़े
लोगों का कहना है कि जिस अधिकारी ने सीमावर्ती क्षेत्र में अपराधियों की कमर तोड़ी और कानून व्यवस्था को मजबूत किया, उसका तबादला लोगों को सहज नहीं लग रहा। हालांकि पुलिस विभाग की ओर से इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नरेश कुमार सुखवाल केवल एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि ऐसे अधिकारी रहे जिन्होंने आम लोगों की बात सुनी, समय पर कार्रवाई की और अपराधियों के खिलाफ बिना किसी दबाव के सख्ती दिखाई। यही वजह है कि उनके जाने की खबर से लोगों के बीच मायूसी है। कांस्या चौकी में उनका कार्यकाल अब भले ही समाप्त हो रहा हो, लेकिन क्षेत्रवासियों की जुबान पर आज एक ही बात है—"कुछ अधिकारी तबादले के बाद सिर्फ चौकी छोड़ते हैं, लेकिन अपनी पहचान और यादें हमेशा के लिए छोड़ जाते हैं।"
संवेदनशील चौकी पर अब क्या होगी रणनीति?
कांस्या पुलिस चौकी भीलवाड़ा जिले की सबसे संवेदनशील चौकियों में गिनी जाती है। मध्यप्रदेश सीमा से सटे होने के कारण यहां मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध गतिविधियों और अंतरराज्यीय अपराधों की आशंका हमेशा बनी रहती है। ऐसे में इस चौकी पर अनुभवी और प्रभावी नेतृत्व की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है। सूत्रों के अनुसार अब इस चौकी की जिम्मेदारी एक हेड कांस्टेबल को सौंपी गई है। ऐसे में सवाल यह उठना स्वाभाविक है कि क्या इतने संवेदनशील क्षेत्र में यह व्यवस्था उतनी ही प्रभावी साबित होगी, जितनी एक अनुभवी एएसआई के नेतृत्व में रही। इसका जवाब तो आने वाला समय ही देगा।